आखर – वर्ष २०१५

आखर – वर्ष २०१६

आखर - कोहबर आर्ट

अपना मातृभाषा भोजपुरी खाति कुछ भोजपुरिया के एगो प्रयास ह ई भोजपुरिया स्वाभिमान सम्मेलन । जवना के शुरुवात जीरादेई नाव के पावन भुमि से भईल रहे आ बाद मे पंजवार के सांस्कृतिक पहचान के संगे अपना पहचान अपना वजूद अपना उद्देश्य के एगो नया रुप देहलस । पंजवार के सांस्कृतिक सांस्कारिक माटी प एक हाली फेरु जमावडा होखे जा रहल बा ३ दिसम्बर के । रउवा से निहोरा बा कि रउवा अपना एह कार्यक्रम मे आई , भोजपुरी के साहित्यिक सांस्कृतिक मजबुती खाति आपन तन मन एह सम्मेलन मे दिँही संगे संगे भोजपुरी के आलोपित होत लोकगीतन से लोकनृत्यन से आपन परिचय करवाई ।
भोजपुरिया स्वाभिमान सम्मेलन - 9
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Aakhar -

आखर , कुछ युवा लोगन के अपना माई भाखा ( मातृभाषा ) के प्रचार प्रसार साहित्यिक विकास खाति एगो प्रयास के नाव ह । आखर पेज के कोशिश बा भोजपुरी साहित्य संस्कृति संस्कार आ भोजपुरियापन के शब्दन से तस्वीरन के माध्यम से कविता के माध्यम से लेख कहानी के माध्यम से समाचार , यात्रा संस्मरण के माध्यम से देस दुनिया के सोझा ले आवल जाउ । आखर पेज अभी तकले तकरीब 120 गो भोजपुरी किताब अपना पेज प समय समयप होखे वाला लेखन प्रतियोगिता मे प्रोत्साहन के रुप मे दे चुकल बा । तकरीबन 18 गो भोजपुरी किताब के डाउनलोड करे के लिंक भी आखर पेज प लागि चुकल बा आ ई कुल्हि चीझू समय समय प होत रहेला । आखर पेज के कोशिश बा कि भोजपुरिया नवहा लोग भोजपुरी मे लिखो , भोजपुरी के अनुभवी लोगन के आशिर्वाद रुपी लेख से आवे वाली पीढी के परिचय होखे आ हमनी के माई भाखा भोजपुरी दिन दुना रात चौगुना बढंती प रहसु । आखर पेज भोजपुरी के आठवा अनूसुची मे शामिल करे खाति संघर्षरत बा आ समय समय प भारत सरकार , सांसद आ विधायक लोगन किहा पाती भी लिखल गईल बा ओह लो के जिम्मेवारी के मन भी परावल गईल बा ।

सुप्रसिद्ध भोजपुरी आ हिन्दी साहित्यकार

 

 

आखर-परिवार के सबसे बड़ आ सबसे बढ़ के जवन योगदान बा, हमरा जाने में, तवन ई कि ई भोजपुरी के चिन्ता से जादे-से-जादे नवहन के जोड़ देले बा आ जोड़त जात बा।

अपना समाज, साहित्य, संगीत, सिनेमा आ सबसे बढ़ के अपना सोच में भोजपुरी एह नया रक्त-संचार के महसूस करे लागल बा अगर आज, त एह में आखर के आपन एगो जबरदस्त भूमिका बा।

शुभ-शुभ ई बा कि भोजपुरी खातिर जवन कइले बानीं, जवन करत बानीं, तवन हमहीं, एह भरम भयावन से ई परिवार कोसन दूर बा। पुरनियन के मय योगदान के सँकारत आ ओकरा से जुड़त-जोड़त, ओकरा के जुटावत, ओकरा से जोर-जुगावत निरन्तर आ डेगरगर आगे बढ़त एह आखर परिवार के एह पँचबरिसा पड़ाव प बहुते आ बहुबिध बधाई। देश आ दुनिया के कोना-कोना में अपना के, अपनन के सम्हारत-सँवारत अपना भोजपुरी के जीयत, अपना भोजपुरी में जागत आ जगावत एह परिवार के सदस्य-सवांग लोग मातृभाषा के नेही-छोही जे बा, जहाँ बा — ओकरा के बल देवे, बेंवत देवे, भरोसा देवे — एही शुभकामना के साथे।

– प्रकास उदय

( सुप्रसिद्ध भोजपुरी आ हिन्दी साहित्यकार )

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