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प्रस्तुत बा 'आखर ई पत्रिका' के  वर्ष अंक 2 ( संयुक्तांक )

प्रनाम आ जय भोजपुरी !

 

आखर के अगिला अंक - वर्ष अंक 2 ( संयुक्तांक )

नेह जब तक बचल रही तब ले,

आखर के दिया के जरहीं के बा ।

विजय दिवस ( विजयोत्सव ) के सेकेराहे बधाई । बाबू बीर कुंवर सिंह जी के बेर बेर नमन ।

पांडे कपिल जी के लिखल शेअर के जदि आखर टीम के उद्देश्य के रुप में देखल जाउ त गलत ना कहाई । आखर टीम के उद्देश्य बाभोजपुरी भाषा साहित्य संस्कृति परम्परा से भोजपुरिया लोगन के भोजपुरी से बहरी गइल लोगन के परिचय करवावलअपना मातृभाषा भोजपुरी आ भोजपुरी में साहित्य खातिर जो‌डल बेहतर करे खातिर उटकेरलउसुकावल । पिछला दू साल से युट्युब आखर चैनल के माध्यम सेपिछला तीन साल से पत्रिका आ वेबसाईट के माध्यम सेपिछला चार साल से फेसबुक पेज आ ट्वीटर के माध्यम से आ पिछला सात साल से भोजपुरिया स्वाभिमान सम्मेलन के माध्यम से आखर लगातार रउवा सभ के बीचे,रउवा सभ के साथेरउवा सभ के संगे भोजपुरी भाषा आ साहित्य खातिर हर तरह से भी‌डल-लागल-जुड़ल-जूटल बा ।

पत्रिका में निरंतरता में कमी आइल बा जवना के जिम्मेवारी आखर टीम लेत बिआकुछ निजी परेशानीकुछ सामाजिकव्यवसायिक आ व्यवहारिक जिनगी के तानाबाना कहि लिंही पत्रिका समय से नइखे आ पावत । बाकिर हमनी के पूरा कोशिश बा कि एह के समय से आ हर महीना ले के आवल जाउ । साहित्य आ भाषा खातिर जरुरी गुणवत्ता के बना के राखल जाव आ आखर टीम एहि दिशाई काम क रहल बिआ ।

अपना तीसरा साल के दूसरा अंक के ले के आखर ई पत्रिका हाजिर बिआ । एह अंक में बतकूचन में सामयिक मुद्दन के समेटलेभोजपुरी भाषा आ साहित्य के व्याकरण के शुरुवाती बात के राखतभरत शर्मा जी से बिस्तार से चर्चाजंतसार प चर्चाभिखारी ठाकुर के नाटकन के सामाजिक स्तर प प्रभाव के बारे में बतकहीभोजपुरिया क्षेत्र चम्पारण के बारे में बतावतराजनिती के नैतिक पतन प चर्चा के नया आयाम देत,महात्मा गांधी आ मार्टिन लूथर किंग के ले के समानांतर बतकही करतनशामुक्ति जइसन सामाजिक विषयन प गहिराह बात राखतकथा-कहानीचित्रकथागीतकविता के बारे में बतियावत लिखत आखर ई-पत्रिका में “मैड मंकीज आ आखर” के ओर से आवे वाली फिल्म ललका गुलाब के बारे में कुछ चर्चा हो रहल बा । यानि कि भोजपुरी भाषा साहित्य आ सम-सामयिक विषयन प बहुत कुछ एह संयुक्तांक में रउवा सभ के पढे के मिली ।

त प्रस्तुत बा आखर ई पत्रिका के अगिला अंक जौहर जी के एगो शेअर के संगे -

उहाँ अनहद अलख के बा जौहर 

जहाँ ज्ञान गंगा तरल बन के आइल ।

अपना मातृभाषा आ साहित्य खातिर लागल रहल जाव... बस अतने के संगे आखर टीम एह अंक के रउवा सभ के अपना भोजपुरिया परिवार के हवाले क रहल बिआ -

 

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