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प्रस्तुत बा 'आखर ई पत्रिका' के  जनवरी-फ़रवरी 2017 संयुक्तांक ।

 

समय कबो केहू के बश में केहू के रोकले ना रुकेला , ना ही समय कबो केहू के इन्तेजार कइले बा । आखर ई पत्रिका के शुरुवात तीन साल पहिले भइल रहे आ एह अंक के निकालत घरी हमनी के दिल-दिमाग में इ चल रहल बा कि तीन साल कइसे निकल गइल पते ना चलल । एह तीन साल में आखर ई पत्रिका साहित्य आ भोजपुरी से जुड़ल हर मुद्दा के छुवे भर के कोशिश कइले बड़ुवे । भोजपुरी भाषा , समाज , क्षेत्र अथाह सागर ह आ एह के नापल एक दू जुग के बस में नइखे त फेरु कुछ शब्दन कुछ अंक कुछ साल में हमनी के हर चीझू के सोझा कइसे ले आ सकेनी जा । एहि से लगातार कोशिश जारी बा , भोजपुरी से जुड़ल हर चीज हर पहलू हर बात के सोझा ले आवे के कोशिश जारी बा ।

आखर ई पत्रिका पिछला कुछ महीना से लगातार आ नइखे पावत जवना वजह से हमनी के संयुक्तांक ले आवे के परत बा । इ देरी हमनी के वजह से बा , टीम पुरा समय नइखे दे पावत बावजूद लागल बानी जा ।

त हर तरह के रस्साकशी आ दौड़-भाग के साथे आखर ई पत्रिका के अगिला अंक यानि कि तीसरा साल के पहिला अंक , संयुक्तांक के रुप में रउवा सभ खातिर प्रस्तुत बा । एह महीना में 21 फरवरी के मातृभाषा दिवस बा एहि से आखर ई पत्रिका के इ अंक मातृभाषा प केंद्रित बा । कुछ महीना पहिले सोनपुर मेला से जु‌डल जानकारी के संगे , नोटबंदी प बतकूचन करत , वैश्विक आंतकवाद जइसन सम-सामयिक विषय प बात राखत , मातृभाषा के केंद्र में राख लिखाइल बाल नाटक के सोझा परोसत , मातृभाषा प ही चित्रकथा के सरिहारत , भाषाई पहचान आ विषय के केंद्र में गद्य , पद्य कविता गजल आदि से इ अंक भरल बा ।

हमनी के कोशिश बा कि भोजपुरी भाषा आ साहित्य के हर पहलू से हर रुप से रउवा सभ के लगातार परिचय करावत रही जा , आ आखर टीम लगातार एहि खातिर प्रयासरत बिआ ।

त आखर ई पत्रिका के अगिला अंक रउवा सभ के सोझा बा । अपना आशिर्वाद से हमनी के साहस बढाई सभे , जवना से हमनी के आगे बढ के भोजपुरी भाषा आ साहित्य में बेहतर क सकी जा आ संगे संगे रउवा सभ के सुझाव के इंतेजार रही जवना से सीख ले के हमनी के आगे अउरी बेहतर करे खातिर चीजन के सरिहार सकीं जा ।

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