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प्रस्तुत बा 'आखर ई पत्रिका' के  दिसम्बर-2016 अंक के प्रस्तुति ।

 

संसार में बोलल जायेवाला भाषा के संख्या कई हजार होई आ हरेक भाषा के आपन इतिहास बा । हरेक देश आपन भाषा के सम्मान करेला काहे से कि जवन देश आपन मातृभाषा से जईसन भाव राखेला ओकर ओहि तरह से संसार भर में आपन भाषा के साथ प्रगति करेला । संसार भर में आपन सामान के व्यापार करेवाला देश चीन, कोरिया आ जापान दोसर भाषा के सहारा ना लेवे । आज एह देशन के अर्थव्यवस्था आ प्रगति दुनिया के सोझा बा । लोग स्वाभिमानी बा आ जहाँ जाला ओहिजा आपन भाषा आ माटी के सम्मान आ स्वाभिमान ना भुलाए । भाषा प्रेम पर भारतेन्दु हरिश्चंद्र जी लिखले बानी कि आपन भाषा से ही उन्नति संभव बा आ इहे आगे बढ़े के आधार ह । मातृभाषा के ज्ञान के बिना हृदय के पीड़ा ना मिटे । हँसी-खुशी, नेह-छोह, उलाहना आ दुख के दर्शावे खातिर आपने मातृभाषा भाषा के जरूरत पड़ेला । जनम के बाद जवन पहिला भाषा लोग सीखेला उहे मातृभाषा कहाला आ ई केहु के सामाजिक आ भाषाई पहचान होला । बाकी आज के शिक्षा व्यवस्था आ सामाजिक नकलपन के दउड़ में लोग एकर महत्व भुलाता । जबकि चाहत रहे कि शिक्षा के आरंभ मातृभाषा में होखे । उ भाषा जवना के लईका जनम से सुनत आ बोलत आवता ओह भाषा में शिक्षा ओकर शिक्षा खातिर ज्यादा बढ़िया रही । गांधी जी मातृभाषा में शिक्षा के समर्थक रहन ।

 

माई, माटी आ मातृभाषा हमेशा सम्मान आ स्वाभिमान के बात ह । लोग एह संसार में आवेला आ चल जाला बस एहिजा ओहलोग के कीर्ति रह जाला आ पाछे ओह कीर्ति के गावे वाला लोग । भोजपुरीया माटी ढेर उर्वर ह जे आपन कोख से अनेकन महान विभूति लोग के एह संसार के देलस । गुरु गोरखनाथ, कबीर, मंगल पाण्डेय, राजेंदर प्रसाद, बिस्मिल्ला ख़ाँ, महेन्दर मिसिर जईसन ढेर लोग से ई धरती धन्य भइल । एह माटी के लोगन खातिर ई अभिमान के बात, एह लोग के गाथा गावल-गोहरावल सम्मान के बात ह । एह लोग के कीर्ति अनमोल थाती ह जेकरा के संभारल आ आगे बढ़ावला के काम ह । ई एगो कर्जा ह जे एह थाती के दोगीना तिगुना करके उतार सकेला । आपन भाषा के ना भुलाये के आ जबे मौका

दिसंबर माने पुस महिना, खेत से धान खलिहान में आ रहल होई । नयका धान के चिउड़ा आ गुड़ के ताव मिली । ठंढ के प्रकोप में कउड़ा पर घर परिवार गाँव समाज पर चर्चा चली । देश में बदलाव के रेघारी केतना टहक बा इहो बत्कूचन के विषय रही । प्रेम सौहार्द बनल रहे आ बनल रहे सगर समाज । भारत विविधता के देश ह एक डोर एक रंग जहाँ अलग अलग सूता मिलके डोरी के मजबूती देला । इंद्रधनुष के सात रंग जब मिल जाय त धवल उज्जर रंग बनादे जे शांति के प्रतीक ह । एही महिना में ईद-ए-मिलादुन्‍नबी आ क्रिसमस पड़ी । सब त्यौहार उमंग आ खुशी लेके आवेला । आपसी मेल मिलाप आ भेंट के बहाना ह परब-त्यौहार आ जीवन में रंग एही परब-त्यौहार से होला ।

 

3 दिसंबर राजेन्दर बाबू के जनम दिन ह । भारत के पहिला राष्ट्रपति । भोजपुरिया माटी के लाल । एह पुन्न दिन पर आखर परिवार पंजवार जिला सिवान में भोजपुरिया स्वाभिमान सम्मेलन के आयोजन करेला । भोजपुरी साहित्य के पुरोधा लोग के ईयाद आ सम्मान करेला । साहित्य संगीत के संगम में हरेक साल भोजपुरी के जायगान होला । आखर परिवार एह अंक में कुछ भोजपुरिया साहित्यकार लोग के रचना के संग्रह कर के ओह लोग के नमन करता । साहित्य के समुन्दर में ढेर मोती बिखरल बा, सब मोती एक से बढ़ के एक । अब एह में बीस गो साहित्यकार के चुनल बड़ा दुरह काज रहल ह । ओह सब साहित्यकारन के नमन जे भोजपुरी साहित्य के थाती के सजवलस संवरलस । रवा सभे के सोझा बा भोजपुरिया साहित्यकारन के कीर्ति के सहेजत “भोजपुरिया थाती” अंक । उम्मीद बा “आखर” के ई अंक रउआ अपेक्षा पर खरा उतरी ।